पानी का मौसम कविता | Panee Ka Mausam Kavita

फिर पानी का मौसम आया।

झिलमिलाहट
भीग जाओ, कई स्नान करो,
पानी में वापस नाव
शैतानी मौसम आ गया है!

सर्द हवाएं
कहानियों, मीठी कहानियों का मज़ाक उड़ाते हैं
कानों में रस घुल जाता है।
कहानी का मौसम!

अंबर ने जमीन पर पानी डाला
हरी घास का कालीन,
कुहू-कुहू के साथ आया था
कोयल रानी का मौसम!

जामुन, आम, मीठा पपीता
मिस्र से लाए गए खरबूजे,
गर्म फ्रिज, चाय-समोसा –
एक साथ गुड़ का मौसम!

छाता लेकर चलें अब
अब अपने मन को पुनर्जीवित करो
लहरों के साथ खेलते हैं
मनमाना मौसम आ गया है!

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *