पंपापुर जाना है कविता |Pampaapur Jaana Hai Kavita


पंपापुर जाना है हमको
पंपापुर जाना है,
पंपापुर जाकर मस्ती का
रंग जमाना है!…
पंपापुर जाना है!

पंपापुर जिसमें बच्चों की
इक दुनिया है प्यारी,
खेलकूद, सर्कस, मेलों में
खुशियाँ बिखरीं सारी।
पंपापुर में अलग सभी से
रंग, रंग, बस रंग,
पंपापुर में है जीने का
एक नया ही ढंग।

पंपापुर में तो सपनों का
ताना-बाना है,
पंपापुर से अजी हमारा
प्यार पुराना है।
भूल गए हम पंपापुर को
पंपापुर भी भूला,
पर पंपापुर जाना है अब
पंपापुर जाना है!

पंपापुर जाकर फूलों से
थोड़ा हम खेलेंगे,
नाचेंगे हम झूम-झूमकर
हाथ-हाथ में लेंगे।
पंपापुर में नाटक-कविता
या प्यारी कव्वाली,
पंपापुर में रोज मनेगी
हाँ, अपनी दीवाली!

चलो-चलो जी, आज चलेगा
नहीं बहाना है,
नहीं वहाँ कुछ भी खोना है
सब कुछ बस पाना है!
पंपापुर जाना है-
हमको पंपापुर जाना है!

पंपापुर में खेल-कूद की
है सबको आजादी
किस्से खूब सुनाया करती
थी कल तक यह दादी।
पंपापुर में खुशी-खुशी,
हर बच्चा नाच दिखाए,
पंपापुर में फूल-फूल, हर तितली
सुर में गाए!

गाना है-गाते-गाते ही
पंपापुर जाना है,
पंपापुर में बच्चों का
एक देश बसाना है।
पंपापुर…पंपापुर…मन में,
एक तराना है!
पंपापुर जाना है
हमको पंपापुर जाना है।

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